इतिहास

आज से लगभग 6000 वर्ष पूर्व इस भू-भाग पर अयोध्या नगरी के संस्थापक मनु एवं उनके वंशजो का शासन था । मनु के जेष्ठ पुत्र इक्ष्वाकु की आठवी पीढ़ी से उत्पन युवनाश्व के पुत्र श्रावस्त ने हिमालय की तलहटी में अचिरावती (राप्ती) के तट पर एक नगरी बसाई जो कुछ समय पश्चात् उन्ही के नाम पर श्रावस्ती कहलाई , जो की कौसल की राजधानी थी ।महाराज श्रावस्त की पचासवी पीढ़ी में महाराज रघु कौसलपति हुए ,महाराज रघु ने सरयू और अचिरावती (राप्ती) के बीच एक सुविस्तृत क्षेत्र गोचर भूमि हेतु सुरक्षित कर दी । गायों के निवास भूमि की प्रधानता के कारण कौसल राज्य का यह क्षेत्र गोनर्द कहा जाने लगा जो वर्तमान में गोंडा के नाम से प्रचलित है । महाराज रघु के बाद राजा दशरथ कौसल के राजा हुए ।राजा दशरथ के बाद उनके पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम राम चन्द्र जी ने अपने पुत्र लव को उत्तर कौसल का राज्य दिया ।लव ने इस राज्य की राजधानी श्रावस्ती निर्धारित की । मर्यादा पुरुषोत्तम राम चन्द्र जी के वंशज वृहद्बल हुए । कौसल का यही राजा वृहद्बल महाभारत में कौरवों के पक्ष में पांडवो के विरुद्ध लड़ता हुआ अभिमन्यु द्वारा मर गया ।महाभारत युद्ध के बाद जो सूर्यवंशी राजा हुए उनमे प्रसेनजित 27 वें थे ।


बौद्ध मत गर्न्थो में प्रसेनजित का नाम महाकौशल है ।प्रसेनजित पहला राजा थे जिन्होंने भगवान बुद्ध से दीक्षा ले कर बौद्ध धर्म स्वीकार किया था ।महाभारत युद्ध के पश्चात् प्रसेनजित अंतिम इक्ष्वाकु वंशीय राजा थे । प्रसेनजित के मृत्यु के पश्चात् अजातशत्रु ने श्रावस्ती का शासन प्रबन्ध अपने हाथ में ले लिया ।अजातशत्रु मगध नरेश बिम्बसार का पुत्र तथा प्रसेनजित का दामाद था ।इतिहास के अनुसार श्रावस्ती कई बार मगध राज्य के अधीन रहा जिसमे कई वंश के शासको जैसे शिशुनाग वंश (413 ई०पू० ),नन्द वंश (321 ई०पू),मौर्य वंश (321 ई०पू० -180 ई०पू०),शुंग वंश आदि ने शासन किया । शुंग वंश का राजा पुष्यमित्र था जिसने 180 ई०पू० से 36 वर्ष तक सफलता पूर्वक शासन किया । इसके बाद कुषष्ण वंश ,नाग वंश तथा गुप्त वंश का शासन श्रावस्ती पर रहा । गुप्त वंश के शासक चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने बहुत से मंदिर बनवाये जिसमे बलरामपुर का देवीपाटन मंदिर ,गोंडा के तरबगंज तहसील में बाराही मंदिर ,तथा पृथ्वी नाथ महादेव मंदिर शामिल है । गुप्त वंश के बाद इस भूमि पर पुष्यभूति वंश और प्रतिहारो का शासन रहा । आठवी शताव्दी में मंडल का यह भू-भाग कन्नौज प्रतिहारो के शासन के अंतर्गत आ गया । सुल्तान महमूद गजनवी के आक्रमण के समय में परिहार राजा विजयपाल का पुत्र राजपाल राज्य करता था ।920 ई० के आसपास यह भू-भाग प्रतिहार राजाओ के हाथ से निकल चुका था । 1020 ई० में श्रावस्ती में मयूरध्वज का राज्य था । मयूरध्वज के बाद हंसध्वज,मकरध्वज,सुधन्वाध्वज और सुह्रध्वज श्रावस्ती के राजा हुए ।

Read More